उत्तर प्रदेशराज्य

लखनऊ में बढ़ी गर्मी, NCR में प्रदूषण ‘बहुत खराब’ स्तर पर

लखनऊ

 उत्तर भारत में गर्मी अब सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के लिए दोहरी चुनौती बनकर सामने आ रही है। एक ओर आसमान से बरसती आग और पछुआ हवाओं की तपिश है, तो दूसरी ओर गिरती हवा की गुणवत्ता ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। लखनऊ में जहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंचकर लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गया है। आने वाले दिनों में गर्मी और प्रदूषण दोनों के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

लखनऊ में चटक धूप और पछुआ हवाओं ने बढ़ाई तपिश
शहर में बीते दो दिनों से अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। गुरुवार को यह 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक रहा। सुबह से ही तेज धूप निकलने और दिनभर गर्म पछुआ हवाएं चलने के कारण गर्मी की चुभन लोगों को बेहाल कर रही है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है, जबकि लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। रात का तापमान भी 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे राहत कम ही मिल रही है।

2-3 दिन तक शुष्क रहेगा मौसम
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना रहेगा।
कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और आने वाले 2–3 दिनों तक पछुआ हवाएं जारी रहेंगी। इससे तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।

एनसीआर में गर्मी के साथ प्रदूषण का कहर
गर्मी के साथ-साथ एनसीआर के शहरों में प्रदूषण ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में तापमान 38–39 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है। इसके साथ ही हवा की रफ्तार कम होने और धूल भरी हवाओं के कारण प्रदूषण के कण वातावरण में जमा हो रहे हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

AQI ‘बहुत खराब’ स्तर पर, गाजियाबाद सबसे ज्यादा प्रभावित
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा का AQI 255 (खराब), ग्रेटर नोएडा का 318 और गाजियाबाद का AQI 308 दर्ज किया गया है। गाजियाबाद की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। बीते कुछ दिनों में यहां AQI 170 से बढ़कर 308 तक पहुंच गया है, जो तेजी से बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को दर्शाता है।

धूल और हवाओं से बन रहे स्मॉग जैसे हालात
विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की रफ्तार कम होने और धूल भरी हवाओं के चलते प्रदूषण के कण वातावरण में स्थिर हो रहे हैं। इससे स्मॉग जैसी स्थिति बन रही है, जो सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। अगर हवा की गति नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

40 डिग्री पार जाने का अनुमान, लू चलने की चेतावनी
मौसम विभाग के मुताबिक, 21 से 24 अप्रैल के बीच तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही लू चलने की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में दिन के समय बाहर निकलना और भी मुश्किल हो सकता है।

स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा, विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और प्रदूषण का यह दोहरा असर शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, मास्क का उपयोग करने और पर्याप्त मात्रा में पानी व तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है

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