विदेश

नेपाल में संकट गहराया, सरकार ने हफ्ते में दो दिन की छुट्टी का ऐलान किया

नेपाल

पड़ोसी देश नेपाल इस वक्त एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही भारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने नेपाल सरकार की नींद उड़ा दी है। इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर फैसला किया है कि अब से देश में हफ्ते में दो दिन (शनिवार और रविवार) को पूरी तरह से सरकारी छुट्टी रहेगी। इस कड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को कम करना और पेट्रोल-डीजल की खपत में भारी कटौती करना है।

हफ्ते में केवल पांच दिन ही खुलेंगे सरकारी कार्यालय, बैंक और अन्य सार्वजनिक संस्थान

नेपाल में आम तौर पर पारंपरिक रूप से सिर्फ शनिवार को ही साप्ताहिक अवकाश होता था और रविवार को वर्किंग डे माना जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी कार्यालय, बैंक और अन्य सार्वजनिक संस्थान हफ्ते में केवल पांच दिन ही खुलेंगे। काम का कोई नुकसान न हो और आम जनता को परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए सरकार ने बाकी पांच दिनों में ऑफिस की टाइमिंग बढ़ाने का भी खाका तैयार किया है। सरकार का सीधा सा गणित है कि दफ्तर बंद रहने से सड़कों पर गाड़ियां कम निकलेंगी, जिससे हर महीने करोड़ों रुपये का ईंधन बचेगा। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू किया जा रहा है।

विदेशी आय घटने के कारण नेपाल का खजाना तेजी से खाली हुआ

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी और मुख्य वजह नेपाल का खाली होता विदेशी मुद्रा भंडार है। नेपाल अपनी जरूरत का 100 प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ भारत और अन्य देशों से आयात करता है, जिसका भुगतान उसे अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है। हाल के महीनों में आयात के बिल बढ़ने और पर्यटन व रेमिटेंस से होने वाली विदेशी आय घटने के कारण नेपाल का खजाना तेजी से खाली हुआ है। नेपाल ऑइल कॉर्पोरेशन पहले ही भारी घाटे में चल रहा है और उस पर करोड़ों का कर्ज है। ऐसे में, ईंधन की खपत को बलपूर्वक कम करना ही सरकार के पास सबसे त्वरित और कारगर उपाय बचा था।

कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जो बेतहाशा वृद्धि हुई है, उसका सीधा असर नेपाल जैसी छोटी और आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। नेपाल के केंद्रीय बैंक (नेपाल राष्ट्र बैंक) ने भी सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर विदेशी मुद्रा को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में दवाइयों और खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों का आयात भी मुश्किल हो जाएगा। श्रीलंका में हाल ही में जो आर्थिक त्रासदी देखने को मिली है, नेपाल उससे सबक लेते हुए पहले ही एहतियाती कदम उठा रहा है।

अन्य प्रशासनिक खर्चों में भारी कमी आएगी

सरकार को उम्मीद है कि 2 दिन की छुट्टी से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि बिजली और दफ्तरों में होने वाले अन्य प्रशासनिक खर्चों में भी भारी कमी आएगी। इसके अलावा, प्राइवेट सेक्टर से भी अपील की गई है कि वे भी अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम या दो दिन की छुट्टी का विकल्प दें, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की बचत की जा सके। यह नेपाल के लिए एक कड़ा इम्तिहान है और आने वाले कुछ महीने देश के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करेंगे।

अर्थशास्त्रियों ने इसे "कड़वी जरूरी दवा" बताया

नेपाल सरकार के इस फैसले पर जनता और विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। अर्थशास्त्रियों ने इसे "कड़वी लेकिन जरूरी दवा" बताया है, जो विदेशी मुद्रा बचाने में मददगार साबित होगी। वहीं, आम जनता और व्यापारियों का एक वर्ग चिंतित है; उनका मानना है कि लगातार दो दिन दफ्तर बंद रहने से प्रशासनिक काम धीमे हो जाएंगे और दूर-दराज से आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

नेपाल का वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक एक संयुक्त समीक्षा बैठक करेंगे

इस फैसले के लागू होने के ठीक एक महीने बाद नेपाल का वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक एक संयुक्त समीक्षा बैठक करेंगे। इस 'फालोअप' रिपोर्ट में यह जांचा जाएगा कि दो दिन की छुट्टी के फॉर्मूले से असल में कितने बैरल पेट्रोल-डीजल की खपत कम हुई है और इससे कितने डॉलर की विदेशी मुद्रा बची है। अगर नतीजे सकारात्मक रहे, तो इसे लंबे समय तक लागू रखा जा सकता है।

नेपाल के अंदर 'लोकल टूरिज्म' (घरेलू पर्यटन) को बढ़ावा मिल सकता है

नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर करती है। इस नए नियम का एक पहलू यह भी है कि लगातार दो दिन की छुट्टी मिलने से नेपाल के अंदर 'लोकल टूरिज्म' को बढ़ावा मिल सकता है। लोग वीकेंड पर घूमने निकल सकते हैं, जिससे स्थानीय होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, बशर्ते लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button