SEBI का सख्त एक्शन: प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर 7 दिन का प्रतिबंध, जानें वजह

नई दिल्ली
शेयर मार्केट रेग्युलेटरी सेबी ने स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर तगड़ा एक्शन लिया है. सेबी-रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर प्रभुदास लीलाधर प्राइवेट लिमिटेड पर 15 दिसंबर, 2025 से सात दिनों के लिए नए ग्राहकों को जोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह बैन सेबी और एक्सचेंजों के संयुक्त निरीक्षण के बाद लगाया गया है, जिसमें जांच के समय क्लाइंट फंड मैनेज, सेटलमेंट और मार्जिन रिपोर्टिंग में कई खामियां पाई गई थीं.
यह मामला 2 नवंबर से 8 नवंबर, 2022 के बीच की गई जांच में 1 अप्रैल, 2021 से 31 अक्टूबर, 2022 तक के संचालन में पाया गया.जांच अधिकारियों ने पाया कि तीन नमूना डेट पर ब्रोकर का कैलकुलेशन किया गया, जिसमें कुल वैल्यू निगेटिव थी. इसमें कुल 2.70 करोड़ रुपये की कमी थी. सेबी ने कहा कि यह कमी क्लाइंट फंड के दुरुपयोग का संकेत है.
नियामक ने स्टॉक ब्रोकर को कस्टमर्स के अकाउंट का निपटान न करने के लिए भी फटकार लगाई. आदेश में विस्तार से बताया गया है कि 1,200 से ज्यादा कस्टमर्स के फंड सेटलमेंट अनिवार्य तिमाही या मासिक समय-सीमा के भीतर नहीं किया गया.
जांच में क्या-क्या निकला?
सेबी का आदेश ग्रॉस-वैल्यू के निष्कर्षों से कहीं आगे जाता है. नियामक ने पाया कि ग्राहकों के चालू खातों का निपटान नहीं हुआ, 1283 नॉन-ट्रेडिंग कस्टमर्स (तिमाही) के कुल 36 लाख रुपये के फंड का समय पर निपटान नहीं किया गया, 677 मासिक गैर-व्यापारिक मामलों की राशि 2.85 करोड़ रुपये थी और तीन ट्रेडिंग कस्टमर्स तिमाही मामलों में 39 लाख रुपये शामिल थे.
इसके अलावा, ऑपरेशन संबंधी कमियों में दिन के अंत (EOD) और पीक मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग भी शामिल थी. निरीक्षण में पाया गया कि ब्रोकर ने एक्सचेंज को ऐसे मार्जिन की जानकारी दी थी, जो वास्तव में वसूले ही नहीं गए थे और एक मामले में पीक मार्जिन का कलेक्शन कम हुआ था.
कस्टमर्स पर जुर्माने का बोझ डाला
साथ ही ब्रोकर को क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा एडवांस मार्जिन की कम वसूली के लिए लगाए गए जुर्माने का बोझ अपने कस्टमर्स पर डालने का दोषी पाया गया. सेबी ने दोहराया कि सदस्यों को 'किसी भी परिस्थिति में' अपफ्रंट मार्जिन की कम वसूली के कारण क्लियरिंग कॉर्पोरेशन द्वारा लगाए गए जुर्माने का बोझ ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है.
ब्रोकर प्लेटफॉर्म ने क्या कहा?
प्रभुदास लीलाधर ने अपनी दलील में कहा कि कथित खामियां 'तकनीकी और प्रक्रियात्मक थीं, जानबूझकर नहीं' और कई गलतियों के लिए मैनुअल या लिपिकीय गलतियां जिम्मेदार हैं. ब्रोकर ने यह भी तर्क दिया कि वह अलग-अलग न्यायिक कार्यवाही में पहले ही 11 लाख रुपये का जुर्माना भर चुका है और नए कारोबार पर प्रतिबंध से उसकी प्रतिष्ठा और कर्मचारियों के मनोबल को स्थायी नुकसान होगा.
हालांकि सेबी के चीफ जनरल मैनेजर एन. मुरुगन ने कहा कि अतिरिक्त ब्रोकरेज की छोटी मात्रा और निरीक्षण के बाद सुधारात्मक कदम जैसे कारकों पर विचार किया गया, लेकिन उन्होंने ब्रोकर को दायित्व से मुक्त नहीं किया है.



