धर्म ज्योतिष

महाभारत के 5 महान योद्धा जिन्हें सीधे युद्ध में नहीं हराया जा सका

इसमें कोई शक नहीं कि महाभारत काल में पृथ्वी पर ऐसे-ऐसे योद्धा मौजूद थे, जिनकी ताकत देवताओं से भी अधिक मानी जाती थी. जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ, तो कौरव और पांडव, दोनों पक्षों के लिए इन महारथियों को हराना लगभग नामुमकिन था. यही वजह थी कि धर्म की जीत सुनिश्चित करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को कई बार रणनीति, छल और युक्ति का सहारा लेना पड़ा. अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे योद्धाओं को हराना संभव नहीं था और शायद पांडव कभी जीत ही नहीं पाते. आज हम आपको महाभारत के उन 5 योद्धाओं के बारे में बताएंगे, जिन्हें सीधे युद्ध में नहीं, बल्कि रणनीति और छल से मारा गया.

भीष्म पितामह

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे अनुभवी और शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे. उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया था और उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. युद्ध में वे कौरवों के सेनापति थे और लगातार 10 दिनों तक पांडवों की सेना का भारी विनाश करते रहे. उन्हें हराना लगभग असंभव था. तब श्रीकृष्ण की योजना के अनुसार अर्जुन ने शिखंडी को अपने रथ के आगे खड़ा किया. भीष्म ने शिखंडी को स्त्री मानते हुए उस पर हथियार उठाने से इंकार कर दिया. उसी क्षण अर्जुन ने तीरों की वर्षा कर दी और भीष्म को शरशैया पर लिटा दिया.

द्रोणाचार्य
गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य, कौरव-पांडव दोनों के गुरु थे और अत्यंत शक्तिशाली योद्धा भी. जब तक वे युद्ध में थे, पांडवों की सेना को भारी नुकसान हो रहा था. उन्हें हराने का एक ही तरीका था, उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना. श्रीकृष्ण की योजना के तहत भीम ने अश्वत्थामा नाम के हाथी को मार दिया और यह खबर फैलाई गई कि अश्वत्थामा मारा गया. जब युधिष्ठिर ने यह बात कही, तो द्रोणाचार्य को विश्वास हो गया कि उनका पुत्र मर चुका है. दुख में उन्होंने हथियार छोड़ दिए, और उसी समय धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया.

जयद्रथ
जयद्रथ, दुर्योधन का बहनोई था और अभिमन्यु की मृत्यु में उसकी बड़ी भूमिका थी. इससे क्रोधित होकर अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे, अन्यथा अग्नि में प्रवेश कर लेंगे. कौरवों ने जयद्रथ की कड़ी सुरक्षा कर दी, जिससे अर्जुन के लिए उसे मारना लगभग असंभव हो गया. तब श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को ढक दिया, जिससे अंधेरा हो गया. जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो चुका है और वह बाहर आ गया. तभी श्रीकृष्ण ने माया हटाई और अर्जुन ने तुरंत उसका वध कर दिया.

कर्ण
कर्ण महाभारत के सबसे वीर और दानवीर योद्धाओं में से एक था. उसके पास जन्म से मिले कवच और कुंडल थे, जो उसे लगभग अजेय बनाते थे. श्रीकृष्ण की योजना के तहत इंद्र ने ब्राह्मण का रूप लेकर कर्ण से उसके कवच-कुंडल दान में मांग लिए. दानवीर कर्ण ने बिना सोचे-समझे उन्हें दे दिया. युद्ध के दौरान कर्ण का रथ कीचड़ में फंस गया. जब वह उसे निकालने के लिए नीचे उतरा, तब श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने निहत्थे कर्ण पर वार कर दिया और उसका वध कर दिया.

दुर्योधन
दुर्योधन अत्यंत बलशाली योद्धा था. उसकी मां गांधारी के वरदान के कारण उसका शरीर लगभग अजेय हो गया था. जब भीम और दुर्योधन के बीच गदा युद्ध हुआ, तो भीम उसे हरा नहीं पा रहे थे. तभी श्रीकृष्ण ने इशारे से बताया कि दुर्योधन की जांघ (कमर के नीचे का हिस्सा) कमजोर है. गदा युद्ध के नियमों के विरुद्ध जाकर भीम ने दुर्योधन की जांघ पर वार किया, जिससे उसकी मृत्यु हुई.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button